Navaratri-नवरात्रि

Navratri date 2020 and shubh muhurat in 2020 | २०२० नवरात्री कब है ?

Q. नवरात्रि २०२०

A. (17 अक्टूबर - 25 अक्टूबर) - 2020

Q. Navratri(नवरात्रि)

A. नवरात्रि, (संस्कृत: "नौ रातें") पूर्ण शरद नवरात्रि में; नवरात्रि में भी नवरात्रि की धूम रही; हिंदू धर्म में, दैवीय स्त्रियों के सम्मान में आयोजित होने वाला प्रमुख त्योहार जिसे दुर्गा पूजा भी कहा जाता है।

Q. माँ दुर्गा के ९ रूप?

A. शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री

Q. नवरात्री को सही रूप से कैसे मनाए ?

A. अपने मन और सरीर को बिश्राम दें। अपने मूल को याद कीजिये। श्रद्धा रखिये ।

Q. नवरात्री के व्यंजन क्या हे?

A. खिचड़ी, उपवासी, जीरस, चावल, दही, कढ़ी

Q. नवरात्रि के दौरान किस भोजन से बचना चाहिए?

A. आपको नियमित रूप से टेबल सॉल्ट होने से बचना होगा। इसके अलावा, अपने व्रत के भोजन को केवल घी या मूंगफली के तेल में तैयार करें। नवरात्रि के दौरान तामसिक खाद्य पदार्थों को खाने की अनुमति नहीं है।इसका मतलब है , आप लहसुन और प्याज नहीं खा सकते।

Q. ९ रंग नवरात्री के क्या है?

A. संतरा,सफेद,लाल,शाही नीला,पीला,हरा,धूसर,बैंगनी,हरा (पीकॉक ग्रीन)

Q. इस साल नवरात्री कब शुरू होता है ?

A. हर साल नवरात्री पितृपक्ष के अगले दिन ही शुरू हो जाता है। लेकिन इस साल अधिकमास के कारन नवरात्री का पर्व कुछ दिन खिसक गया है। ऐसा लीप वर्ष के कारन हुआ हे। ऐसा संजोग १९ साल बाद फिर से आया हे। इस साल नवरात्री १७ अक्टूबर से शुरू होता है।

Q. नवरात्री में पूजा क्यों किया जाता है ?

A. देवी दुर्गा और उनके विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं जो शक्ति के प्रतीक हैं और वांछित चीज़ों को लाने की क्षमता रखते हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि ये 9 देवी देवता (नव दुर्गा) थीं जो सबसे खतरनाक दानव को जीतने में सक्षम थीं जिन्हें किसी भी अन्य महाशक्तियों द्वारा पराजित नहीं किया जा सकता था।

Q. नवरात्री 2020 का शुभ मुहूर्त ?

A. नवरात्री का प्रथम दिन घटस्थापना का सुबह मुहूर्त प्रातः 6.23 से 10. 12 तक हे।

Q. कितने तरह के पूजा विधि हे ?

A. पंचोपचार पूजा- देवता को पाँच अर्घ्य अर्पित करते हैं, अर्थात् गंध ,फूल ,धूप ,दीप , नैवेद्या षोडशोपचार पूजा- देवता को सोलह विशिष्ट वर चढ़ाएं
मानस पूजा - एक सगुन मूर्ति की कल्पना करना और मानसिक रूप से इसकी पूजा करना। पारा पूजा -वाक् विधा के माध्यम से निर्गुण परम ब्रह्म की पूजा करना।